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मेरे अल्फाज़

दर्द-ए-हाल

Suman Agarwal

1 कविता

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चोट खाई है इस दिल ने,जख्म कैसे मिटाओगे
मिला है धोखा जीवन में,गम कैसे भुलाओगे

जमाने ने बहुत रोका, उसको भूल जाने को
आगाह किया हमको,वरना बहुत पछताओगे

आँखों से अश्क के मोती,बह रहे है इस कदर
दर्द-ए-हाल इस दिल का,तुम किसको सुनाओगे

कांटो से दोस्ती करके,हम,तो फूल समझ बैठे
हमको क्या खबर ऐसी,जिन्दगी भर रुलाओगे

गैरों के खातिर उसने, हमको बहुत रुलाया है
हमारी है दुआ उनको,चोट तुम भी तो खाओगे

ऐसी क्या खता हुई हमसे, तुम इतना बदल गये
लिखा हाथों की लकीरों में,भाग्य वैसा ही पाओगे

सोचा था हम दर्द होगा, वो तो बेदर्दी निकला
छोड़ दो बीती बातों को,और कितना सताओगे

रुठे दिल को मनाऊं कैसे,मनाना भी नहीं आता
खबर थी भूल गिले-शिकवे,हमको गले लगाओगे।

- सुमन आगरी

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