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मेरे अल्फाज़

वतन के लिए

Sujeet Mishra

504 कविताएं

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कुछ ना पूछो जिगर का है कितना बड़ा ।
कितने फांसी चढ़े, कितने हो गए शहीद ।।
नाम अब भी तो उसका है यारों बड़ा,
हंसके झूल गया जो वतन के लिए ।।
:- सुजीत कुमार मिश्रा प्रयागराज।


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