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मेरे अल्फाज़

मन मेरा आज बहकता है

Sujeet Mishra

305 कविताएं

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जाने क्यूं इतनी हलचल है मन मेरा आज बहकता है ।।
उसके आने की खबर से ही तन मेरा आज महकता है।।
वो तो पंछी है परदेशी हर डाल पे दाने चुनता है।
नादान ये दिल समझाऊं क्या मेरा दिल मेरा माने ना ।।
कोठरी, आंगन से दरवाज़े पर नैन टिकाए रहता है।
बेबस लाचार सा लगता है बेमोल भला क्यूं बिकता है।।
सुजीत दिलों की धड़कन भी निर्मोही बैरन सा लगता है।
दिल को झुठलाकर बहलाकर कब कौन कहां रह सकता है।।
जाने क्यूं इतनी हलचल है मन मेरा आज बहकता है ।।


 सुजीत कुमार मिश्रा प्रयागराज।


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