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मेरे अल्फाज़

महक छोड़ जाउंगा...

Sujeet Mishra

45 कविताएं

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फूल-ए-गुलाब में महक छोड़ जाऊँगा,
तेरे दिल के घुँघरू में छनक छोड़ जाउँगा।
मैं मेरी प्यार की यूँ खुशबु बनकर,
इन वादियों, इन फिजाओं में महक छोड़ जाऊँगा।।

~ सुजीत कुमार मिश्रा, प्रयागराज ,उत्तर प्रदेश भारत 212303

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