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मेरे अल्फाज़

हमें बिकना नहीं आता है।

Sujeet Mishra

551 कविताएं

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रूस्वत में तनिक मुझ को जीना नहीं आता है ।
उल्फत में सनम के मुझ को मरना नहीं आता है ।।
जो बात "हिन्द" की हो, भले लाख़ स्वार्थ हो ।
हम मर मिटेंगे पर हमें बिकना नहीं आता है।।
 
सुजीत कुमार मिश्रा
प्रयागराज।


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