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मेरे अल्फाज़

आस तेरा है मनमोहन...

Sujeet Mishra

152 कविताएं

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दर दर भटका, पर ना मिला कोई तेरे जैसा मनमोहन।
अब आखरी आश तुम्ही से है, विश्वास तेरा है मनमोहन।।
इस मायावी जग में आकर के, निश्चय मैं राह भुला बैठा।
निज कर कृपालु मोहे राह दिखा, अब आस तेरा है मनमोहन।।

- सुजीत कुमार मिश्रा, प्रयागराज 

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