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मेरे अल्फाज़

आज फिर याद पुरानी आई

Sujeet Mishra

144 कविताएं

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आज फिर याद पुरानी आई ।
बनके जज़्बात ,जवानी आई ।।
जाने क्या रंग तेरे दामन में,
ढलके तेरे रंग रवानी आई।।
अबकि बस कर ना सका हद तुझपे ।
तेरी आगोश में मुझे, नींद सुहानी आई ।।

:- सुजीत कुमार मिश्रा, प्रयागराज ।


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