आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Yakeen hota nahi

मेरे अल्फाज़

यक़ीन होता नहीं

Sujeet kumar mishra SITTEE

38 कविताएं

20 Views
यकीन होता नहीं है किसी को दिलाने से
हुआ एकबार तो डिगता नहीं है डिगाने से

करें फ़रियाद उनके दिल मे भी जज़्बात आ जाये
हसीं ऐसा कहा फिर मिलता है जमाने में

इरादा तो नहीं था बस हुआ है अचानक से
कोई गिरता नहीं है चाहत में गिराने से

उम्र कम है समय कम है इरादों में बड़ा दम है
न ज़्यादा वक़्त ले ख़ुदा मेरी किस्मत सज़ाने में

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!