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मेरे अल्फाज़

नये साल की बधाई

Sudhir Khatri

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नये साल की बधाई

मुबारक हो,सबको मुबारक नये साल का अवागमन,
न जाना हमने, कि तू जुदा होगा,छोड़ देगा पुराना दामन,

मगर कोई रोक सका है,जाते हुऐ बहते लम्हों को,
वो जो चाहत करता है , उसकाे कैसे रोक सकते हैं दामन,

ऐ जाने वाला साल,तेरा कैसे सौपें दामन उस गोसाई को
बधाई-बधाई है, नये साल की बधाई,थाम लो सावन,

इस खुशी की धडी में,हम उसे याद कर ले,
और हम शान से,सब अपनी जिन्दगी सवार ले,

उठे हम सूरज सा,और गगन मैं,स्थान ले,
बधाई हो सब को नये साल की बधाई दे,

बादलों ने लूटी,तारों की दौलत,
उडा़ ले,गया ,गगन वक्त-ए-ख्वाब ए राहत,
ना लोटेगी कोइ बीती हुई चाहत,
जो अब भी न जागेंगेेे न पायेंगे राहत,
बधाई हो बधाई हो,नया साल लाये सब की चाहत,

चाहत की रातेेें तो अ जन्मे हैं,सवारी,
खबर दे रही हैं, ये इबादत-ए-बुखारी,
अब सामने आयेंगी महकतीं राहे हमारी,
( कवि खत्री भेल
बधाई हो बधाई हो नये साल की सबको हमारी/, बनारसी,)


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