आपका शहर Close
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Do not Grope my heart
Do not Grope my heart

मेरे अल्फाज़

न देखो मेरा मन यूँ टटोलकर

Sudhir Bansal

160 कविताएं

264 Views
आग बारिश का पानी लगाने लगा |
दिल में धुआँ उठा यूँ मन खौलकर ||

हवाएँ ही पहले से मुश्किल बनीं हैं |
आँधी न बनो अब यूँ डोलकर ||

दिल में तूफ़ान पहले से आया हुआ है |
तोड़ो न मेरा दिल अब यूँ बोलकर ||

घोलने को तो सब कुछ घुल ही जायेगा |
दिखाओ न तेवर यूँ बिष घोलकर ||

दिल को दिल से ही दिल में छिपाना भी सीखो |
बनाओ न दूरी अब यूँ तौलकर ||

बिकने वाला तो कब का बिक ही गया |
ख़रीदो न हमको अब यूँ मौलकर ||

लोगों को तो कुछ भी मजा चाहिए |
घूमो न कहीं यूँ बदन खोलकर ||

इतना गुस्सा भी आना मुनासिब नहीं ।
दिल भी पकने लगेगा यूँ खौलकर ||

प्यार को प्यार से ही छू लो मगर |
न देखो मेरा मन यूँ टटोलकर |

-सुधीर बंसल

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!