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Do not Grope my heart

मेरे अल्फाज़

न देखो मेरा मन यूँ टटोलकर

Sudhir Bansal

169 कविताएं

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आग बारिश का पानी लगाने लगा |
दिल में धुआँ उठा यूँ मन खौलकर ||

हवाएँ ही पहले से मुश्किल बनीं हैं |
आँधी न बनो अब यूँ डोलकर ||

दिल में तूफ़ान पहले से आया हुआ है |
तोड़ो न मेरा दिल अब यूँ बोलकर ||

घोलने को तो सब कुछ घुल ही जायेगा |
दिखाओ न तेवर यूँ बिष घोलकर ||

दिल को दिल से ही दिल में छिपाना भी सीखो |
बनाओ न दूरी अब यूँ तौलकर ||

बिकने वाला तो कब का बिक ही गया |
ख़रीदो न हमको अब यूँ मौलकर ||

लोगों को तो कुछ भी मजा चाहिए |
घूमो न कहीं यूँ बदन खोलकर ||

इतना गुस्सा भी आना मुनासिब नहीं ।
दिल भी पकने लगेगा यूँ खौलकर ||

प्यार को प्यार से ही छू लो मगर |
न देखो मेरा मन यूँ टटोलकर |

-सुधीर बंसल

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