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मेरे अल्फाज़

परिणय वेला...

Sudher Mohan

29 कविताएं

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ऐ तरूणी में मदहोश नही, ये होश नशीला है मेरा
में उस रस का ही प्यासा हूं,जो रूप रशीला है तेरा 
आंखे खुल जाती हैं मेरी, और में सोया ही रहता हूं
के हाल तेरा तो तू जाने, में तुझमें खोया रहता हूं 
एेे चंद्रमुखी पहचान मुझे, अब समंझना हे बस काम तेरा
हर शब्द मेरा लेना चाहे अपने मुख से बस नाम तेरा 
मेरे दिल का ये दिल करता है, तेरे दिल से गले मिले वाेे भी
ओर बांहे बंधन बन जायें, रूक जाये ये वक्त तभी 
तेरे केशों को वेणी बंधन से, मुक्त में करना चाहता हूं
क्या कहती है धडकन तेरी, धडकन से सुनना चाहता हूं 
एक शीतल मंद हवा तेरे, केशों की मुझपर आने दें
तेरे स्वांसो की मीठी खुशबु, तन पर मेरे पड जाने दे 
मिलना होगा मेरे यार तुझे, ये प्रेम रंगीला है मेरा
में उस रस का ही ----------------

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