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मेरे अल्फाज़

हमने देखा है

Sudhanshu Raghuvanshi

16 कविताएं

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हमने देखा है अक्सर हरी जमीं को लाल होते हुए...
उजालों को दिनों के, अंधेरों से कैद-ए-जाल होते हुए
बावजूद खुशियों के सुकूं था अंंदाज़-ए-हँसी में उसके..
हमने देखा है बदतर महल वालों के सूरत-ए-हाल होते हुए
थोड़ी हवा पाते ही अकड़ जाते हैं पर इनके,
हमने देखा है खासे-अच्छों के पर उतरते,हलाल होते हुए
ये दर्द और गम की लहरों से जो डर जाते हैं,सुन लें
हमने तैराई है कश्तियां बहुत इस सागर में,बेढाल होते हुए


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