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मेरे अल्फाज़

वो मेहबूब हमारी हैं

Sudhanshu Ankit

12 कविताएं

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जिसकी बातों में हैं "सैराबियात"
जिसकी चेहरे में हैं "मासूमियत"
वो मेहबूब हमारी हैं ।।

जिसकी होठों में है "शहद"
जिसकी आँखों में हैं "अहद"
वो मेहबूब हमारी हैं।।

जिसकी यादों में हैं "सुकून"
जिसका अस्पर्श करे ग़मो को "मरहूम"
वो मेहबूब हमारी हैं।।

जिसके पहलु में हो "बहार"
जिसकी जुल्फे करे प्यार का "इज़हार"
वो मेहबूब हमारी हैं।।

जिसके साथ शब हो हसीन ,,,
सेहरा अप्रतीम ,,
वो मेहबूब हमारी है।।

सुधांशु अंकित 


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