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मेरे अल्फाज़

जोत तेरी अमर रहे

subhash sharma

28 कविताएं

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जोत तेरी अमर रहे
हे माँ जोतावालिये
सब पर तेरी मेहर रहे 
हे माँ मेहरावालिये

तू भक्तों की माता है 
तू दुष्टों की नाशिनी
तेरे क्रोध से थर-थर काँपे 
भैरवनाथ भी दामिनी
युँहि दहाड़े शेरा तेरा 
हे माँ शेरावालिये
सब पर तेरी ....

ऊँचे पर्वत पर जा बैठी 
सब पर नज़रें रखती है
किसको क्या तकलीफ है 
सबकी ख़बरें रखती है
जब चाहा उसे पास बुलाया 
हे माँ पहाड़ावालिये
सब पर तेरी ....

जय माता दी बोलो भक्तों 
सब दुखड़े मिट जाएंगे
पॉंवों के जो छाले हैं 
फूलों से खिल जाएंगे
सबके आँसूं पौंछेंगी 
वो माँ ममतावालिये
सब पर तेरी ....

'' सुभाष ''

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