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मेरे अल्फाज़

लड़की के लिए समाज की सोच

Anonymous User

1 कविता

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पल-पल दिल में आहट होती है,
हर कोई हमारे दर्द को समझे ये चाहत होती है,

क्या..? तुमको ऐतबार नहीं आता,
हम भी है किसी के प्यारे ये एहसास नही आता,

क्यूँ तुमको हम बेटियां अलग लगती हैं,
हे जान ऐसी ही हमारी, जैसी है एक जान तुम्हारी,

मानवता का क्या यही काम है,
न्याय में इन दुष्कर्मो का ना जाने क्या अंजाम है,

हर रोज़ एक बेटी लहु में डूबी मिलती है,
यह दुनिया क्या यूँही चलती है...

है सोच यही अगर तो शमशान यह संसार है,
नहीं है, सोच ऐसी तो किसका यह काम है..

आगे फिर यह काम ना हो
इंसानियत कभी शर्मसार ना हो...!
Writter Soyyab


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