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मेरे अल्फाज़

दोस्त

sonu kumari

6 कविताएं

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ज़िंदगी की इन राहों में
कई दोस्त मिल जाते हैं
ज़िंदगी को जीने का मतलब
हमको वो सिखाते हैं।
नए सफ़र में नए डगर में
वो प्यारी याद बनाते हैं
फिर ना जाने किसी शहर में
कहीं गुम हो जाते हैं।
हँसी-मज़ाक, मौज-मस्ती
करना हमें सिखाते हैं
नहीं सुलझती इस ज़िंदगी की गुत्थी
अब वो दोस्त बहुत याद आते हैं।
भविष्य के प्यारे सपने बुनना
हमको वो सिखाते हैं
कम पड़े जो हौसला मेरा
और उत्साह बढ़ाते हैं।
बेरंग सी इस जिंदगी में
वो कई रंग भर जाते हैं
जिंदगी की इन राहों में
अब वो दोस्त बहुत याद आते हैं।
जी करता है लौट चलूं फिर
ज़िंदगी की उन राहों में
जहां कभी बुनते थे सपने
हमेशा साथ निभाने के।
पर ना जाने क्यों व्यस्त हो गए
सब घर-परिवार, पैसों के चक्कर में
खो गए वो मेरे दोस्त
ज़िंदगी की इन राहों में।

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