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मेरे अल्फाज़

फिर लौट कर आऊंगी

sonu kumari

5 कविताएं

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जा रही हूं दुनिया से
फिर लौट कर आऊंगी
अपने साथ हुए जुल्मों का
फिर हर किस्सा बतलाऊंगी
सो रहे उन हमसे को
मौत की नींद सुलाउंगी
सुलग रही दिल की ज्वाला से
अब उनकों मजा चखाउंगी
जा रही हूं दुनिया से
अब इंदिरा बनकर आउंगी।
अंधेरे पड़ इस घर में फिर
खुशियों के दीप जलाउंगी
अधुरे पड़े पिता के ख़्वाब
को फिर से मैं सजाउंगी।
नहीं थमेगी मेरी जंग
जब तक ना हर
लड़की हथियार उठाएगी
हो रही हर हिंसा का
अब वो मुंहतोड़ जवाब दिलाएगी
जा रही हूं दुनिया से
अब हिमा बनकर आउंगी।
रेप हो या घरेलू हिंसा
उन सबको में मिटाउंगी
सो रहे उन हवसो को
अब मैं सबक सिखाउंगी
जा रही हूं दुनिया से
अब कल्पना बनकर आउंगी।
नहीं डरेगी अब कोई लड़की
रात के इन अंधेरों से
नहीं डरेगा अब कोई बाप
बेटी के बाहर जाने से
खिल उठेंगे हर मासूम से चेहरे
जिन पर परदा खौफ़ का था
अब उड़ेगी हर वो बेटी,
जिनपर
परदा लोग का था।
आ रही हूं दुनिया में
अब बहादुर बेटी मैं कहलाउंगी।


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