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 They know

मेरे अल्फाज़

उन्हें पता

Sohan Singh

17 कविताएं

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उन्हें पता था हम उस गली में आएंगे
फिर न रुके यूं तन्हा तन्हा खुद ही चल दिये
कुछ सवाल छोड़ गए जिनको हम जी रहे
जिनके लिए इंतजार कर रहे, वक्त रहते न मिले
सवालों के लिए सबब
क्यों वो तन्हा हो चले अब
नजरें मिलाने से भी कतरा रहे
यादें समुख होकर भी उन्हें दूर रखे
उनके चहरे के दीदार को
वक्त बे वक्त याद आता
अब वक्त ही छुपा रहा जज्बात को
फिर भी चल गए वो न मिले
ना मिल फिर वक्त की चाह में
उन्हें पता था उस गली में हम आएंगे
उनके दीदार इजहार को पाएंगे
फिर भी न जाने क्यों वो चल दिये

-सोहन सिंह

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