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"The Shadow of the Lord"

मेरे अल्फाज़

प्रभु की छाया

Sohan Singh

15 कविताएं

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सब मनावत की कुकर्मता
समक्ष नही ममता
फिर भी पांखड देखो कैसे जन्मता
कही फाड़ हृदय को दिखाता
तो कहीं आंसू बहाता
आनंद कहीं खुद में बसाता
ऐसी विचित्र उसकी कटुता
रूप निरूपा कर कर गुजरा
फिर भी गरूर उठाता
रंग स्वम का संगरूप
सब राम के रूप
असहाय स्वयं को पाता
प्रभु कृपा के पात्र
स्वयं को न कर पाता
चल चल नाक रगड़ मत
तू है प्रभु का करदाता
उसकी माया ह्रदय की काया
तू कर कुछ ऐसा
मिल जाए ईश्वर की छाया
तब जाकर जन्म सिद्ध हो जाये

-सोहन सिंह

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