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"The Shadow of the Lord"

मेरे अल्फाज़

प्रभु की छाया

Sohan Singh

17 कविताएं

32 Views
सब मनावत की कुकर्मता
समक्ष नही ममता
फिर भी पांखड देखो कैसे जन्मता
कही फाड़ हृदय को दिखाता
तो कहीं आंसू बहाता
आनंद कहीं खुद में बसाता
ऐसी विचित्र उसकी कटुता
रूप निरूपा कर कर गुजरा
फिर भी गरूर उठाता
रंग स्वम का संगरूप
सब राम के रूप
असहाय स्वयं को पाता
प्रभु कृपा के पात्र
स्वयं को न कर पाता
चल चल नाक रगड़ मत
तू है प्रभु का करदाता
उसकी माया ह्रदय की काया
तू कर कुछ ऐसा
मिल जाए ईश्वर की छाया
तब जाकर जन्म सिद्ध हो जाये

-सोहन सिंह

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