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 "Pain"

मेरे अल्फाज़

वेदना

Sohan Singh

15 कविताएं

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मेरी पीड़ा की वेदना नहीं समझता कोई
अभी यहां तो कभी वहां है खोई ।।
हर स्वप्न से पीर पराई होई
मेरी वेदना को समझता न कोई ।।
हर तख्त सुमेर पलट जाते
बस सब वेदना के सागर में बह जाते।।
अब दुख सिहर सिहर कर रोये
परणीत, प्रवीण सुमल सब सोये ।।
अब सब पहर पुराने हो गए
सब अपने वीराने हो गए ।।
साथ न कोई चल सका
अब सब रंग बहाने हो गए ।।
रह रहकर खो रहा
मन विचलित हो रहा ।।
किस पल आंख से आंसू आ जाये
वो पल आये ना, ऐसा कुछ हो जाये ।।
मेरी वेदना को पार लगा जाए
खुशनुमां जिंदगी दे जाए ।।
इस पल को जीने को जी रहे
जिस पल में खुशियां दुगनी हो जाये।।

-सोहन सिंह

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