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मेरे अल्फाज़

सुनामिका

Siraj Ansari

14 कविताएं

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सुनामी कन्या- सुनामिका,
आयी है पाताल से
लेकर आशा की किरण
उनके जीवन में जो भूल चुके थे हंसना
खो चुके थे सर्वस्व अपना
कुछ भी न छोड़ा था
प्रकृति के तांडव ने
बस कुछ चिथड़े और आंसू
लेकिन एक आशा थी
आशा एक नए संसार की
उजड़े हुए घोंसलों के नव-निर्माण की
आंसुओं का पानी लेकर
और अवशेषों का संग्रह और
फिर जन्म लिया सुनामी कन्या ने
जिसके अवतार मात्र से दुनिया खिलखिलाई
पथराई आंखों में नए आयाम बने
सूख चुके होंठों पर फिर से लाली आयी
सुनामी में बह चुके सपनों को समेटकर
खुशियों को झोली में बटोरकर
घर-घर गयी सुनामिका
अब मेरे घर आई है यह
शांत सी शांति-दूत
शांत किंतु भावनाओं का सागर
शब्दहीन किंतु वाचाल
मासूम किंतु चंचल
खुशियों की वजह बनकर
आंसुओं का दमन करने
वह आती रहेगी हर बार
जब जब कालचक्र चलेगा
संकट की घड़ी में
सुनामिका आएगी
ज़रूर आएगी
आशाओं का उपहार लेकर
वह ज़रूर आएगी

-सिराज अंसारी (बीएससी,एमएड)

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