आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Mombatti ki Apeal

मेरे अल्फाज़

मोमबत्ती की अपील

Siraj Ansari

7 कविताएं

176 Views
ओये! मोमबत्ती इधर ला
भाई ज़रा इसमें माचिस लगा
ले भाई तू भी एक ले
जला इसे और एक सेल्फी ले।
आजकल ये हो रहा है मेरे साथ...
और लोग कह रहे हैं
सती प्रथा खत्म हो गयी
वर्षों पहले।।
जबकि हकीकत ये है कि
मुझे जलाया जाता है रोज़
कभी चौराहे पर
कभी घरों में
दुकानों में, स्कूलों में
पार्कों में, अस्पतालों में
उत्पीड़न तो मेरा हो रहा है
हत्या तो मेरी हो रही है।।
सीमा पर कुछ हुआ तो
जलाओ भई मोमबत्ती
बलात्कार कहीं हुआ तो
जलाओ भई मोमबत्ती।।
और तो और...
मेरी बहन अगरबत्ती
उसको भी कभी भी, कहीं भी
सुलगा देते हैं लोग।
मेरा भाई दीपक
बेचारा जलता रहता है
और ये निकम्मी सरकारें
और जाहिल जनता
जलाती रहती है हमें
और हमारे परिवार को।।
हमारी कोई नहीं सुनता
हमारे लिए कोई आवाज़ नहीं
कोई आंदोलन नहीं।
हम पीड़ित हैं वर्षों से
दलित हैं जन्मों से
अरे कभी हमारी जगह
जला के देखो उन दोषियों को
शायद हमारा परिवार बच जाए।।
- सिराज अंसारी


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!