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मेरे अल्फाज़

अरे! छोटू

Siraj Ansari

7 कविताएं

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अरे! छोटू
अरे! छोटू इधर आना
ज़रा दो कप चाय लाना
हाँ तो भाई साहब
मैं कह रहा था
बाल श्रम सरासर गलत है भई
हंसता खेलता बचपन छोड़
काम पे लगा देते हैं माँ बाप
पढ़ने की उम्र में
भला कोई काम करवाता है।
अरे! छोटू एक सिगरेट ले आना
और माचिस भी
अच्छा ये टेबल भी साफ कर देना।
हाँ तो भाई साहब
बहुत गुस्सा आता है यार
जब लोगों को
छोटे छोटे मासूम बच्चों से
काम कराते देखता हूँ।
खून खौल जाता है मेरा तो
जी करता है ऐसे माँ बाप को
जेल भिजवा दूं बस।
अरे! छोटू ज़रा पानी का जग ले आ।
मैं तो कहता हूँ
कठोर से कठोर कानून बने
और सबको सज़ा मिले
जो इनसे इनका बचपन छीनते हैं
अरे! छोटू ज़रा........
सिराज अंसारी (बीएससी, एमएड)


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