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मेरे अल्फाज़

धनक खुशियों वाला

singh saroj

29 कविताएं

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धनक खुशियों वाला

नए नए विचार अक्सर आते हैं 
जब हम छत निहार रहे होते हैं
खुशियों के लम्हे किसी भी 
रूप में आकर सामने खड़े हो जाते हैं
तब भी जब हम चाहे कैसे भी
हालत से गुजर रहे हों
एक धुंध का अपने आप छंट जाना 
और किसी दुविधा या समस्या का 
वो समाधान सामने आ जाना जो 
हम पहले नहीं देख रहे थे 
जैसे बादलों के पीछे से
सूरज का निकल आना 
एक नई रोशनी को साथ
लेकर एक नए रूप में चमकना
बिलकुल नए रूप में
ऐसे पल लेकिन बुलाने से नहीं आते 
अपने आप आते हैं 
बस विचारों को अपने आप बहने की
आज़ादी चाहिए ऐसे लम्हे 
अक्सर तब भी आ धमकते हैं 
जब हम उदासियों की धुंध में घिरे होते हैं
और ऐसी कोई उम्मीद नहीं कर रहे होते हैं 

सरोज सिंह

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