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मेरे अल्फाज़

माँ-बाप

Siddhartha Saravat

3 कविताएं

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माँ ने तुझको निज रक्त से सींचा,
पिता ने खुदको तेरी ढाल बनाया
अदभुद सुखद था वो क्षण उनका,
जब लाल उनका जीवन में आया

माँ ने नौ मास निज उदर में रखा,
तुझे इस संसार में लाने को
पिता ने हरदम मस्तिष्क में रखा,
तेरा उज्जवल भविष्य बनाने को

तुझको कैसी स्वर्ग की चिंता,
जो तूने उनको ध्याया हो
अपने ऐसे सुकर्मों से तूने,
निज घर ही स्वर्ग बनाया हो

चाहे कितनी उन्नति तू कर ले,
पर उतना न उठ पायेगा
खुद को बौना ही देखेगा जब,
चेहरा माँ-बाप का सामने पायेगा

एक दिन तेरी गृहस्थी होगी,
तेरी पत्नी के भी होंगे कुछ सपने
उनका भी उनका भी सम्मान तू करना,
बस भूलना ना माँ-बाप को अपने

ईश्वर का आशीर्वाद समझ,
जो तूने माँ-बाप को पाया हो
भाग्यवान समझना खुदको,
जबतक उनका तुझपर साया हो।

सिद्धार्थ सरावत

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