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मेरे अल्फाज़

भारत अखंड रहेगा

Shyam Kunvar

45 कविताएं

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गजल- अखंड भारत अखंड रहेगा
आखिर कमी क्या हमारे प्यार साथ मेरा मंजूर नहीं
अड़ गए घर बांटने बताते तुम क्यो मेरा कसूर नहीं
दिलोजान से चाहा तुमको हमेसा गले लगाआ
हम दोनों है भाई –भाई हर बार तुम्हें समझाया
मिल के रहेंगे साथ तोड़ना रिश्ता हमारा दस्तूर नहीं
देकर कितनी कुरबानिया हमने बनाया आशिया
दुश्मनों मार भगाया मिल के सजाया हिन्द वादिया
किसनेआग लगाई दिल तेरे बुझाये कोई समुंदर नहीं
पहले ही टुकड़े किए है घर हमारे रहनुमाओ ने
जली जो तिस्नगी बुझी नहीं जालाया बदगुमानों ने
अबके जो बिछुड़े मिलना नहीं दुबारा दिन दूर नहीं
आओ मिलके घर के मसले खुद ही सुलझाये
चाहे जो भी हो दिवारो दर घर फौलादी हम बनाए
भारत अखंड रहेगा ज़ोर लगाले कोई जरूर नहीं

श्याम कुँवर भारती
बोकारो झारखंड मोब 9955509286

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