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मेरे अल्फाज़

हिन्दी भजन-दरबार मेरी माता का

Shyam Kunvar

47 कविताएं

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हिन्दी भजन – दरबार मेरी माता का
जगमग जगमगाए दरबार मेरी माता का 
पगपग पुष्प खिलखिलाए हरबार मेरी माता का 
जगत जननी जगदंबा माँ तू कहलाती है 
दुर्गा काली लक्ष्मी अम्बा दुनिया पहचानती है 
सारे जग मे होती जयजयकार मेरी माता का 
दसो दिशाओ पहुंचे तेरा हाथ दस भूजाओ वाली 
कभी न छोड़े साथ मेरे आप दस बिद्दाओंवाली 
मंदिरो भक्तो लगा अंबार मेरी माता का 
माथे की बिंदिया चम चम चमके कानों बाली लटके 
काली केस कंधे लहराए बड़ी बड़ी आंखे कृपा बरसे 
लाल लाल चुनर छाए पूरे संसार मेरी माता का 
पायल पावों मे छमछम छमके संग मेहँदी महावर महके
शंख चक्र कमल कृपाल गदा भाला माला कर रह रह दमके 
कभी न छोड़े भारती चरण इस बार मेरी माता का 

- श्याम कुंवर भारती ,ढोरी बोकारो
झारखंड

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