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मेरे अल्फाज़

होली के रंग

Shyam

4 कविताएं

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होली के दिन दिल मिल जाते हैं।
रंगों में रंग जाते हैं।।
बैर भाव से मिट जाते हैं।
आपस में मिल जाते हैं।।
सारे जहां को ख़ुशियों की लहरें।
ख़ुशियों से भर देती हैं।।

होली के दिन दिल
बच्चे भी नाचे बूढ़े भी नाचे।
आपस में गले मिल जाते हैं।।
प्यार का संदेशा देते हैं।
और सदा मुस्काते हैं।।

होली के दिन दिल
प्रकृति भी खुश हो जाती है।
फसलें भी लहरती हैं।।
सारे जगत को रंगों की होली।
रंगों में रंग जाती है।।

होली के दिन दिल मिल जाते हैं।
रंगों में रंग जाते हैं।।


नितेश कुमार पाठक
बाहोरवा हरदोई


सखियो के संग होली खेलन घर जो मेरे आये
मैं कान्हा बन जाऊ उस दिन, वो राधा बन जाये
वसन्त ऋतू के इस मौसम में खेले रंग गुलाल
गोरे गोरे गाल गोरी के गोरे गोरे गाल

जब जब मुझ को देखे शर्म से हो जाते है लाल
गोरे गोरे गाल, गोरी के गोरे गोरे गाल

शादाब जफर ‘‘शादाब’’
नजीबाबाद (बिजनौर)


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