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मेरे अल्फाज़

तुम्हारी याद

shwati pandey

19 कविताएं

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रास्ते जो तुम तक जाते हैं,
वहां अब चट्टानों का पहरा है।
मांद पड़ी ये फूल-पत्तियां देखो,
मगर एहसासों का रंग सुनहरा है।

तुम कहते थे अमावस की रात में भी,
रौशनी तुम्हारे आँचल में बिखेरूँगा।
वो चाँद रात न होगा तो क्या हुआ?
मैं चाँद बन तुम्हारे छत पे उतरूँगा।

पाँव पानी में डाले सोच रही तुझको,
एहसासों में नमी न रह गयी हो जैसे।
तिनका-तिनका चुनती रहती हूँ यादों के,
हर जगह एक कमी सी रह गयी हो जैसे।

यादों के झरोखों की है ठंडी सी हवा,
मन को चन्दन सा महकाती रहती है।
हर पैतरे आजमाती हूँ डूबे रहने को तुझमें,
साँसों में तेरी ही खुशबू घुली रहती है।

कितना अजीब महसूस होता है देखो?
सब कुछ हो पास बस तुम ही नहीं।
वैसे ही जैसे एहसास दबे हो मन में,
और कहने को अब कोई शब्द नहीं।
Shwati pandey(varanasi)


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