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 Love Beyond Love

मेरे अल्फाज़

इश्क के पार इश्क

Shushma Kumari

1 कविता

227 Views
ये जिस्म, ये जान, ये रूह
ये जज्बात, ये एहसास, ये अश्क
ये तड़प, ये ख्वाब, ये ख्वाहिश
इश्क मुकम्मल नहीं फिर भी
शुक्रिया तुम्हें फिर भी
पता तो लगा कि खुदा ने
किया है शामिल
हमारे वजूद में कुछ और भी...

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