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मेरे अल्फाज़

मां की दुआएं बहुत है

Shubhraankur Parihar

5 कविताएं

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बहुत शोरगुल है फिजाओं में ,शायद आने को जैसे हवाएं बहुत हैं।
किसी ने मेरे नाम की सिजदा की है, अरमां किसी ने जगह बहुत हैं।
मुकम्मल सा होने लगा ख्वाब मेरा,अदा की किसी ने सदायें बहुत हैं ।
बद्दुआओं से डर मुझको लगता नहीं अब ,मेरे हक में माँ की दुआएं बहुत हैं।

रहने दो मुझसे ना तुम दिल लगाओ मेरी जिंदगी में खिजायें बहुत हैं।
भले बेवफा हमको कहता जमाना कभी हमने भी की वफाएं बहुत हैं।
मनाया है बहुतों को हमने भी ज़ानिब,हमने भी नखरे उठाए बहुत हैं।
ना अब हमसे उम्मीद रखो कोई भी हम जिंदगी के सताये बहुत हैं।

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