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मेरे अल्फाज़

बोलती रात

Shubham Shubham

2 कविताएं

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रात बोलती है , रात बोलती है ,
क्योंकि यह दुर्जनो के चेहरे पर से अच्छाई का पर्दा खोलती है।
रात बोलती है।
रात बोलती है,रात बोलती है,
क्योंकि जब सारी दुनिया कहा पीकर सोती है तो
यह दीन-दु:ख़ियो के खाली पेट की आवाज बोलती है । रात बोलती है।
रात बोलती है,रात बोलती है,
क्योंकि नारियों के प्रति अबला की
विचारधारा की बेड़ियों में बंधे इस समाज की घबराहट रात
होते ही अय्यासो की आवाज के रूप में बोलती है।रात बोलती है।



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