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मेरे अल्फाज़

क्या होगा

Shubham Raghuvanshi

4 कविताएं

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न पूछ इस सफर का अंजाम क्या होगा
देखा जायेगा जो होगा सो होगा
अभी कदमों से कदम मिला तो जरा
देखेंगे तब ही कौन जुदा कौन साथ होगा
ठोकरें, रुकावटें तो जान हैं सफर की
बिना इनके सफर क्या ख़ाक होगा
रात के अंधेरों से न डरा कर इस कदर
सिमट जाएँगे ये जो सुबह का आगाज़ होगा
हर लुफ़्त उठा ले इस सफ़र का
ये खत्म हुआ तो नया कोई न रास्ता होगा
क्यों करता है परवाह उसकी जो कल आएगा
दम भर बस आज का कल क्या पता क्या होगा
वक़्त का क्या है, न ठहरा है न ठहरेगा,मगर
हर लम्हा जीयेंगे जिन्दगी सा जो तू साथ होगा
तू जिये मेरे लिए,ये दिल धड़के तेरे लिए बस
फिर छोड़ दे परवाह जमाने का क्या होगा

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