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मेरे अल्फाज़

पिता

SHUBHAM PANDEY

11 कविताएं

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पिता
पीड़ा जिसके ह्रदय में होती
पर अधरों पर हँसी दिखाता है
सारे कष्ट स्वयं ही सहता
सबको ख़ुशी वो दे जाता है ||

आँखे जब भी नम होती है
हँसी और भी बढ़ जाती है
होठों पे बस मुस्कान है दिखती
चुभन ह्रदय में छिप जाती है ||

सारे कष्ट उठाता है, और
हर-क्षण बेचैन ही रहता है
अब कष्ट किसी और को न हो
यही सोच सब सहता है ||

सबको खुश रखने के खातिर
अपने अरमान छिपाता है
सबकी ख्वाहिश पूरी करते-करते
अपने लिए वक़्त ही नहीं पाता है ||

जीवन भर जो करता है
नि:स्वार्थ भाव से करता है
उम्मीद नही किसी से कुछ
बस अपनेपन पर मरता है ||

ऐसा केवल एक चरित्र , इस
जहाँ में मुझको दिखता है
‘पिता’ जिसे कहते है हम
ईश्वर भी उनके आगे झुकता है ||

अपने इन शब्दों को मैं
‘पिता’ को समर्पित करता हूँ
मेरे कारण कभी ठेस न पहुंचे
ईश्वर से यही दुआ मैं करता हूँ ||

शुभम पाण्डेय
छतिरवा पोरा , अयोध्या
उत्तर-प्रदेश



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