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मेरे अल्फाज़

खामोशी

Shubham Mishra

11 कविताएं

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रह गया खामोश जाने किस डर से
बाद मुद्दत के कोई उतरा है नजर से

शुक्रिया राह के खा़र,कंकर औ शोलों का
हँस के गुजरा हूं मोहब्बत की डगर से

थमेगा जाने कब जिन्दगी का काफिला
अब आ चुका हूं आजिज इस सफर से

लम्हों में थे जहाँ वादे ताउम्र साथ चलने के
बहुत आ चुका हूं दूर अब तेरे शहर से

- शुभम मिश्र 'अग्नि '

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