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मेरे अल्फाज़

बंटवारा...

Shrîsh Mîshrâ

2 कविताएं

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पहले सब इंसां होते थे भेदभाव का ज्ञान नहीं था
सत्कर्मी पूजे जाते थे दुष्कर्मी का मान नहीं था
पहले सब इंसां.....

बंटने की जब बारी आई सबसे पहले रंग बंटे
काले निम्न श्रेष्ठ हैं गोरे, जाने कैसे ढंग बंटे
रंगों से इससे पहले तक कोई भी नुकसान नहीं था
पहले सब इंसां .....

दूजी बार बंटे जब हम तो बंटवारा धर्मों का था
उसके पहले तक बंटवारा सबके निज कर्मों का था
ईश्वर, अल्ला को भी बांटा एक कोई भगवान नहीं था
पहले सब इंसां.....

इसके बाद तो हमने अपने धर्मों में विच्छेद किया
कोई ऊंचा कोई नीचा, तरह तरह से भेद किया
सब दोषी हैं बंटवारे के, कोई भी अनजान नहीं था
पहले सब इंसां....

बंटते बंटते हुए हैं इतने टुकड़े के न जुड़ पाएं
इतने आगे बढ़ आये हैं के पीछे फिर न मुड़ पाएं
बंटे अगर तो बिखरेंगे ही किसको इसका भान नहीं था
पहले सब इंसां....


-श्रीश मिश्र

#AzadAlfaz

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