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मेरे अल्फाज़

प्रेम का सागर

Shreegopal Narsan

24 कविताएं

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प्यार के लिए हो गए
सन्त वैलेंटाइन बलिदान
क्लॉडियस ने दे दिया था
उनकी फांसी का फरमान
खुशी नही ,शोक की है ये बात
देह प्रेम की नही है ये कोई बात
सच्चा प्रेम करना है अगर
परमात्मा से ही कीजिए
वैलेंटाइन डे पर उनसे
कुछ रूह रिहान कीजिए
वही तो एक है
जो प्रेम का सागर कहलाता है
उसी के प्रेम से भर लो गागर
वही तो एक सुखदाता है।

-डॉश्रीगोपाल नारसन एडवोकेट
पोस्ट बॉक्स 81,रुड़की,उत्तराखंड
मो0 9412072417
लेखक एक साहित्यकार, पत्रकार, कवि व उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता है।


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