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मेरे अल्फाज़

चुनाव

Shreegopal Narsan

41 कविताएं

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चुनाव

चुनावी हवा अब यहां बहने लगी
परायो को अपना कहने लगी
जरूरत है सभी को वोट की
पार्टियां अब गांव में आने लगी
पांच साल तक जो नजर आएं नही
उन्हें वोट की दरकार होने लगी
एक दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे
रक्षक पर भक्षक आरोप लग रहे
फाइलें तक गायब अब होने लगी
राफेल कागजों में ही उड़ने लगी
जनसरोकार ही सारे भूल गए
वोट शहादत में नजर आने लगी
जो समस्या गिनाये वह गद्दार है
राष्ट्रभक्ति संदिग्ध नजर आने लगी।
-----डॉश्रीगोपाल नारसन एडवोकेट
पोस्ट बाक्स 81,रुड़की, उत्तराखंड
मो0 9412072417



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