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मेरे अल्फाज़

ये सावन ये फुहारें ये मचलते बादल

Shreedhar Editors,

58 कविताएं

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इतना सा प्यार तो करो कि ज़िन्दगी बस़र जाए
वो बात दीगर है कि उसमें कुछ कसर हो जाए

आजकल आसमां से जो मस्त बादल बरसते हैं
ख़ुशहाली की हर बौछार तेरी तरफ हो जाए

बेइंतहां ये सावन, ये फुहारें, ये मचलते बादल
मेरी दुआ है, सारी हरियाली तुझे नज़र हो जाए

अपने रक़ीबों की पूरी फ़ेहरिस्त तू मुझे दे देना,
मेरी दुआएं तेरे लिए, उनके लिए कहर हो जाए

तू क्यों इतना परेशां रहता है तन्हा भीतर-भीतर,
ख़ुदा करे तू मेरी तरह बेफ़िक्र बेख़बर हो जाए

आओ एक शाम किसी गुलिस्तां में गुफ़्तगू करें,
गुलाबों चमेलियों में भी तेरी ख़ुशबू महक जाए

मैं तो तग़ाफुल किया हूं सबकुछ, तेरे सिवाय,
मेरे महबूब! तुझे मेरी वफ़ा की खबर हो जाए।

-- श्रीधर


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