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मेरे अल्फाज़

पूरी रात सिर्फ़ निहारता रहा तुझे

Shreedhar Editors,

58 कविताएं

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हजारों रातों से हसीन है एक शाम तेरे साथ
महकते मयखानों से नशीले दो जाम तेरे साथ

आवारगी में हमने नापे न जाने कितने रास्ते
मैं कहीं पहुंचूं, लेकिन मुक़ाम हो तेरे साथ

सावन जैसे गीले लब तेरे, चकोर सी आंखें
नज़रें चुराती हो, जब उलझा चुका तेरे साथ

तेरी डोर से आसमां तक उड़ने की तमन्ना है
चाहे वहीं काट दे या वापस आऊं तेरे साथ

आम के बागों में, कचनार की ख़ुशबूओं में
कभी मीठी कभी तीखी, जवान यादें तेरे साथ

ये इसरार ये ज़िद ये रफ़त ये हदें तो देखिए
खिलूं तो तेरे साथ, मुरझाऊं तो भी तेरे साथ

तेरी जुल्फ़ें सहलाई थी पलके छू भर ली थी
क्यों लगता है कि, बहुत करीब रहा तेरे साथ

इतनी सी बात पे तूने मेरे नाम की अंगूठी पहन ली
कि एक पूरी रात सिर्फ़ निहारता रहा तुझे तेरे साथ

मोहब्बत से इश्क़ और इश्क़ से कुर्बानी तक
दिल ने पाले हैं बेहद हसीन मंसूबे तेरे साथ।

-श्रीधर


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