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अपनी किश्ती बचाके रखना

                
                                                                                 
                            .ये उम्र आदमी की, बहुत कम है यार
                                                                                                

कहने को सौ साल, हाथ में आधी भी नहीं।

अक्ल और उम्र की मुलाकात होती रही,
हम ही ने हर बार, बीच में टाँग अड़ा दी।

सुनकर उम्मीदों के तराने, थका जा रहा हूँ
मैं किसी और से नहीं, खुद से ठगा गया हूँ।

कई तख़ल्लुसों में, ज़िन्दगी जीनी पड़ी,
हरेक सांस से ज़हर की बूंदें छाननी पड़ी।

पूरी ज़िंदगी मुठ्ठी से पतवार कसे रहना,
दौर-ए-तूफां,अपनी किश्ती बचाके रखना।

- श्रीधर.
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4 months ago

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