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Thi bewafa teri mohabbat ...

मेरे अल्फाज़

अहमदाबाद से हमारी पाठक शोभना कहती हैं 'थी बेवफ़ा तेरी मोहब्बत'

Shobhana Shukla

16 कविताएं

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ना जाने कैसे-कैसे ख्यालों से हम इस दिल को बहलाते हैं 
तुम्हें हम याद भी नहीं हम फिर भी किसी पैगाम की उम्मीद तुमसे लगाते हैं 

थी बेवफा सी वो तुम्हारी मोहब्बत ये तो बखूबी मालूम है हमें 
दिल में कभी तो करते होंगे हमें याद ना जाने क्यों ऐसे ख्याल अब भी आते हैं 

यकीं इस बात का हम अपने दिल को अभी तलक दिला ना सके 
तेरी बेवफाई की वजह जरूर होगी कोई बस यही अपने दिल को समझाते हैं 

है खबर ये हमें भी कि तुमने हमसे बस अपना दिल ही बहलाया था 
तुझे गलत समझे ये दिल हम ये भी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं 

दिल की लगी है ये दिल से कभी जायेगी नहीं 
हाँ वो थी तेरी दिल्लगी तो क्या हम आज भी वफ़ा बस तुम्हीं से निभाते हैं 

ना जाने कैसे-कैसे ख्यालों से हम इस दिल को बहलाते हैं 
मेरी हर शाम तेरी यादों के नाम 

- शोभना 'रितु'
   अहमदाबाद गुजरात

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