अभी ख्वाब अधूरा है....

                                कितने सावन बीत गए
मौजों की रवानगी चूक गए
मेघ बादल अपने ही धून में रहे
प्रियतम के प्यार को नैन तरस गये
अश्क़ों से काजल धूमिल हो गए
हाथों की रंगत मूरछित हो गए
पिया से मिलने को मन तरस गए
धानी चूनरिया में सील लगे ही रहे
मन सजने संवारने को तड़प रहे
झरोखों के पास बैठे नैन बटोही को देख रहे
अब आयेंगे मन सोच रहे
पूरब से सूरज पश्चिम को गए
निष्ठुर मन सोच बैठ गए

शोभा देवी

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5 days ago
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