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मेरे अल्फाज़

मन की उलझन

Shobha Goswami

16 कविताएं

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मन की समझ नासमझ परिभाषा,
चंचल है ये मन।
अदृश्य तीव्रगति और हठधर्मी,
नासमझ है ये मन।
अपूर्ण खुदगर्ज लोलुप्त,
बेइमान है ये मन।
दिल के सम होकर भी दिल का,
प्रहरी है ये मन।
डिग कभी अडिग कभी,
असंतोष सा है ये मन।
संपूर्णता में भी अपूर्णता का,
अहसास दिलाता है ये मन।
गुणों अवगुणों का भंडार,
फसादों की जड़ है ये मन।

- शोभा गोस्वामी

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