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मेरे अल्फाज़

अतिथ सत्कार

Shobh Nath

3 कविताएं

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प्रकृति पुलकित इस सदन से
आज अतिथ सत्कार हो ।
सतरंगी से मंत्रमुग्ध हो,
यह अवसर यादगार हो ।।
गम नहीं यह दिन खुशी का,
नाचो गाओ मस्त रहो तुम ।
खाओ पिओ मौज मनाओ ,
निज काम में व्यस्त रहो तुम ।।
आतिथ्य में फूलों की माला, गुलदस्ता और हार हो ।
प्रकृति पुलकित इस सदन से,आज अतिथ सत्कार हो ।
साथ रहे तुम साथी बनकर,
सुबह से लेकर शाम तक ।
जो भी गलती हुई हो भूलकर,
सुबह से लेकर शाम तक ।।
ख़ता रखो नहीं उर मंदिर में,मुदित मन मनुहार हो ।
प्रकृति पुलकित इस सदन से,आज अतिथ सत्कार हो।
घर जाकर तुम सुख से रहना।
सदा प्रशंसा यहाँ की करना ।।
योग करो तुम रहो निरोगी -
यहीं बात आवाम से कहना ।।
मुख्य अतिथ सबकी ओर से ये सूक्ष्म भेंट स्वीकार हो ।
प्रकृति पुलकित इस सदन से,आज अतिथ सत्कार हो ।

शोभनाथ सिंह यादव
एनटीपीसी सिंगरौली ,शक्तिनगर ।

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