आपका शहर Close
Kavya Kavya
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Yuva

मेरे अल्फाज़

युवा

ShiVendra PaTel

3 कविताएं

21 Views
हे युवा उठो रणधीर हो तुम,
भारत माँ के रणवीर हो तुम।
एक वार करो सौ शीश कटें,
महाराणा की शमशीर हो तुम॥

करो राख़ जो अत्याचारी हो,
तुम तो ज्वलन्त चिंगारी हो।
ना पाक हैं गीदड़ मुट्ठी भर,
तुम सौ सिंघों पर भारी हो॥

पानीपत की तस्वीर हो तुम।
भारत माँ की तक़दीर हो तुम।
जवां हिन्द एक तरकस है,
इसके विकास का तीर हो तुम॥

झाँसी की रौद्र लड़ाई हो,
कुरुक्षेत्र की तुम परछाई हो।
तुम हो चेतक का प्रबल तेज,
तुम समर की कठिन चढ़ाई हो॥

ना-पाक पड़ोसी है कुरीत,
तुम हो रघुकुल की परम रीत।
विध्वंस करो इस लंका को,
तुम भूलो ना अपना अतीत

-शिव

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Your Story has been saved!