आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

किताबें और विद्यार्थी

                
                                                                                 
                            किताबें ही तेरा श्रृंगार है विद्यार्थी,
                                                                                                

किताबें ही तेरा प्यार है विद्यार्थी।

किसी को साथी ना बना अकेला ही चल,
किताबें ही तेरी यार है विद्यार्थी।

इन्हीं में छुपा है तेरा लक्ष्य खोज उसे,
किताबें ही तेरी सफलता का मार्ग है विद्यार्थी।

आदमी से इंसान बनने तक का सफर है इनमें,
किताबें ही तेरे चरित्र का निर्माण है विद्यार्थी।

गुण, दोष, सत्य, अहिंसा सब इनमें,
किताबें ही तेरा संस्कार है विद्यार्थी।

इन्हीं में है दुनिया भर का ज्ञान,
किताबें ही तेरा संसार है विद्यार्थी।

इन्हीं में विराजती है मां शारदा 'शिवचरण',
किताबें ही तेरा करतार है विद्यार्थी।

-शिवचरण सदाबहार

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।

- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
1 week ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X