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मेरे अल्फाज़

नारी का अपमान

shivani singh

69 कविताएं

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एक तरफ रोई मर्यादा
एक तरफ बादल रोये|

नारी का अपमान हुआ तो
आँखो के काजल रोये||

रखा कोंख मे पाला तुमको
जन्म दिया अपनाया भी ,
सहा तेरे सारे जुल्मों को
सबसे बहुत छिपाया भी ,

सरेआम ये निन्दा सुनकर
ममता के आँचल रोये|

नारी का अपमान हुआ तो
आँखो के काजल रोये||

बहना की राखी शर्मायी
माथे की बिंदिया घबरायी
कैसा राक्षस पाला मैने
देख धरा भी आज लजायी
खड्ग उठा कर बध कर दूँ मै
सोच हृदय घायल रोये|

नारी का अपमान हुआ तो
आँखो के काजल रोये||

कोई भेजो फिर कृष्णा को
या भेजो फिर से एक राम,
जिस धरती पर देव हुए हो
करते हो इसको बदनाम
छद्म वेष मे पापी तुझको
देख के गंगाजल रोये||

नारी का अपमान हुआ तो
आँखो के काजल रोये||

डॉ.शिवानी सिंह



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