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मेरे अल्फाज़

देश प्रेम पर

shivangi mishra

1 कविता

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भारत की आज़ादी
भारत की आज़ादी का सपना हमने जब देखा था,
जूझ रहे थे समस्या से पर हाथ में गौरव लेखा था।

मातृभूमि ने लाहुओ से जब स्नान किया ,
मारने को आतुर भारतीयों ने
घरों से अपने प्रस्थान किया,
झांक रही थी जहाँ से धरती अपने पुत्रों को,
वो बंदिश एक गुलामी का झरोखा था।
भारत की आज़ादी की सपना हमने जब देखा था।
भारत की आज़ादी ...........

भोर की किरणों से एक नयी हिम्मत जागती थी,
आज़ादी को आतुर माता चारो दिशाओ देख पुकारती थी,
विदा कर के माताएं जब भेजतीं थी अपने पुत्रों को,
मोह माया के बंधनों को उन्होंने उखाड़ फेखा था।
भारत की आज़ादी का सपना हमने जब देखा था।...2

परिणाम स्वरुप खुनो से सनी जब जीत मिली,
एक नया रूप और धड़कनो को नयी रीति मिली,
रक्त बहाकर वीरों ने इतिहास गढ़ा,
कल्पनाओ को आकाश मिला
अब उसको किसी ने न रोका था।
भारत की आज़ादी का सपना हमने जब देखा था।...2

आज़ादी तो मिली पर आधा हिन्दुस्तान पाकिस्तान हो गया ।

तो इसपर
एकता सब तोड़ गए बट गए धर्म के नाम पे ,
आंगो को काट दिया
सिर्फ बटवारें के नारें थे ज़ुबान पे,
धर्म ने एक नए मुल्क को जन्म दिया और हमको मिला एक धोखा था ।
भारत की आज़ादी का ये सपना न देखा था ,
ये सपना ना देखा था।

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