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There are still many tests left

मेरे अल्फाज़

अभी तो कई इम्तिहान बाकी हैं

Shivanand Upadhyay

16 कविताएं

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जली जमीं पर काला निशान बाकी है
अभी तो कई इम्तिहान बाकी हैं
ये ख्वाब हैं पर अधूरे नहीं
अभी देखना अंजाम बाकी है।

कोशिश की चलने की
पैर लड़खड़ा गये, संभलते हुए
गिरा और फिर उठने की कोशिश हुई
देखा किसी के पैरों का निशान बाकी है।

एक उम्र है हमारे चलने है
एक उम्र रिश्ते बने रहने की
उम्र बीत गयी पहले उस रिश्ते की
तो क्या हुआ...

अभी इस अंध्‍ोरी कोठरी में रोशनदान बाकी है
दूकेला नहीं, अकेला भी नहीं
कोई था जो चला गया
कोई है जो रुका हुआ है
सफर है...

मिलते बिछड़ते रहेंगे कई लोग
डरना क्या, इस छोटे से जंगल में
अभी तो आने कई वीरान बाकी हैं
कभी तुम चले हमसे दूर
कभी हम चले तुमसे दूर
कहीं भी चलें...

पर पहुंचना हमें एक साथ ही है
ये ख्वाब हैं पर अधूरे नहीं
अभी देखना अंजाम बाकी है

- शिव उपाध्याय

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